गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी-कटारमल में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर “ए डे विथ स्टूडेंट्स: रीडिंग नेचर्स सिग्नल्स फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति के संकेतों को समझने, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक बनाने तथा सतत भविष्य के निर्माण में उनकी सहभागिता बढ़ाना था।
इस वर्ष की थीम “पर आधारित कार्यक्रम में जनपद के 14 विद्यालयों से लगभग 80 विद्यार्थियों एवं उनके शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण एवं समूह गठन के साथ हुआ। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. सतीश आर्या ने स्वागत संबोधन में संस्थान की स्थापना, उद्देश्यों और हिमालयी पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका से अवगत कराया। शोध छात्रा पार्निका गुप्ता ने विश्व पर्यावरण दिवस की थीम और वर्तमान में इसके महत्व पर जानकारी साझा की। वरिष्ठ वैज्ञानिक ई. महेन्द्र सिंह लोधी ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यावहारिक स्तर पर कार्य करने को प्रेरित किया संस्थान के निदेशक डॉ. इन्द्र डी. भट्ट ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए युवाओं की सहभागिता पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति से जुड़कर सीखने और दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने को प्रेरित किया। शिक्षक चेतन ने भी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान मिशन शपथ, स्वच्छता शपथ ली गई। संस्थान के सूर्यकुंज में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया। “सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना कहें” विषय पर जागरूकता संदेश भी दिया गया। विद्यार्थियों को समूहों में सूर्यकुंज का भ्रमण कराया गया। उन्होंने प्रकृति, सूक्ष्म जलवायु, मृदा, जल, जैव विविधता तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। फील्ड गतिविधियों के बाद साझा चिंतन सत्र में विद्यार्थियों ने अनुभव साझा किए और समाधानात्मक उपायों पर चर्चा की। उन्हें संस्थान की प्रयोगशालाओं का भ्रमण भी कराया गया।
समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम निदेशक डॉ. आई.डी. भट्ट के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। समन्वयक डॉ. सतीश आर्या, डॉ. आशीष पाण्डेय, ई. हिमांशु जोशी एवं डॉ. मनीष पंत रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. हर्षित पंत, ई. ओम प्रकाश आर्या, मनोज सिंह बोहरा, पूजा रावल, पारस उपाध्याय, अभिषेक, दीपक बिष्ट, डॉ. सुनीता बिष्ट, डॉ. शिव पॉल, डॉ. अनिल शर्मा, पंकज प्रताप सिंह सहित कई वैज्ञानिकों, शोध छात्रों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

