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भारतीय कला संगम रामलीला कमेटी द्वारा भावाधस भारत के पदाधिकारियों का हुआ सम्मान

भारतीय कला संगम रामलीला कमेटी द्वारा भावाधस भारत के पदाधिकारियों का हुआ सम्मान

 

लव कुमार शर्मा, हरिद्वार/ भारतीय कला संगम श्री रामलीला कमेटी सभा गोविंद नगर, रेलवे टीटु कालोनी सहारनपुर में विधायक रवि बहादुर केन्द्रीय सदस्य भावाधस भारत एवं राष्ट्रीय संचालक भावाधस भारत अजय बिरला, पूर्व अध्यक्ष जिला वाल्मीकि सभा सहारनपुर बृजमोहन सूद, एवं गौरव चौहान ने संयुक्त रूप से ज्योति प्रज्ज्वलित कर श्री रामलीला का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर विधायक ने कहा कि भगवान वाल्मीकि के द्वारा महाकाव्य रामायण में उन्होंने राम के बारे में जो हजारों वर्षों पहले जैसा लिखा वैसे ही हुआ है। रामायण में दर्शाया गया है कि एक भाई का भाई के प्रति कितना प्रेम हो, एक पत्नी का अपने पति के प्रति कितना प्रेम हो, और एक राजा का अपनी प्रजा के प्रति कितना प्रेम हो ये सब रामायण में दर्शाया गया है। राष्ट्रीय संचालक भावाधस भारत अजय बिरला ने कहा कि भगवान वाल्मीकि को आदि कवि भी कहा गया है क्योंकि वह संस्कृत भाषा के जनक हैं। उनके मुखमडल से निकला सर्वप्रथम श्लोक मां निषाद प्रतिष्ठा त्वमगम शाश्वती समां। यत्क्रौच मिथुनादेकमवधी,: काममोहितम। भगवान वाल्मीकि सतयुग, त्रेता युग, द्वापरयुग, कलयुग चारों युगों में विद्धमान हैं।

 

द्वापरयुग में जब द्रोपदी ने यज्ञ किया तब वाल्मीकि ने ही शंख बजाकर द्रोपदी का यज्ञ सफल किया। उन्होंने रामायण को केवल लिखा ही नहीं बल्कि उसमें अहम रोल भी निभाया। जब राम ने सीता को देश निकाला दिया तब सीता ने वाल्मीकि के आश्रम में शरण ली और वही उन्होंने लव को जन्म दिया और कुश को भगवान वाल्मीकि ने अपनी शक्ति से कुशा घास में प्राण डालकर उत्पन्न किया। वाल्मीकि ने हमेशा नारी को सम्मान दिया सीता को अपने बेटी बनाकर आश्रम में शरण दी। उन्होंने पावन योग विशिष्ट में लिखा है कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। इसका सदैव पूर्ण सत्कार करना चाहिए। उन्होंने लव कुश को शिक्षा दीक्षा दी और अस्त्र शस्त्र विद्या में पारंगत किया जिसमें उन्होंने राम की पूरी सेना को हराया।

 

वाल्मीकि हमारी संस्कृति के प्रथम आदि कवि एवं गुरु है हम सब उनके ऋणी है। वाल्मीकि शरद पूर्णिमा को प्रकट हुए जिसे हम आज भी प्रकटोतसव दिवस के रूप में बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं। वाल्मीकि किसी एक वर्ग विशेष के न होकर सम्पूर्ण मानव जाति के आदि कवि हैं। अजय बिरला ने कहा कि जिला सहारनपुर के अन्दर पहली बार भगवान वाल्मीकि का चित्र श्री राम लीला में देखने को मिला। अन्य जगहों में हो रही श्री रामलीला कमेटियों को भी श्री भारतीय कला संगम श्री रामलीला कमेटी टीटु रेलवे कालोनी सहारनपुर से प्रेरणा लेनी चाहिए और श्री राम लीला से पहले भगवान वाल्मीकि की फोटो लगाकर स्तुति करनी चाहिए तभी रामलीला का आयोजन सफल होगा।

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