हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी एवं कॉमनवेल्थ एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया (COL-CEMCA) के संयुक्त तत्वावधान में “Graduate Employability and Result-Based Management (RBM) Framework” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज विश्वविद्यालय के सभागार में हुआ। यह कार्यशाला 02 से 04 फरवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता कर रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य रोजगार क्षमता बढ़ाने तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों में कौशल एकीकरण हेतु रोजगार-अनुकूल, कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों के डिजाइन को विकसित करना है, ताकि स्नातकों को कार्यस्थल दक्षता, डिजिटल साक्षरता और उद्योग की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार किया जा सके।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ प्रो. (डॉ.) नवीन चंद लोहानी (माननीय कुलपति), प्रो. (डॉ.) पी. डी. पन्त (निदेशक अकादमिक), डॉ. बी. शद्रक (निदेशक, CEMCA) एवं प्रो. (डॉ.) राजेश पी. खंबायत (प्रोजेक्ट सलाहकार–CEMCA) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ. गोपाल दत्त ने किया।निदेशक अकादमिक प्रो. पी. डी. पन्त ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह पहल यूओयू के शैक्षणिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता एवं रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए तैयार की गई है। उन्होंने ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) प्रणालियों में परिणामोन्मुखी, कौशल-समेकित दृष्टिकोण की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया।
विशेष संबोधन में डॉ. बी. शद्रक ने कहा कि आज के नियोक्ता ऐसे स्नातकों की अपेक्षा करते हैं जो सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में लागू कर सकें। आरबीएम ढाँचा संस्थानों को इनपुट-आधारित सोच से आगे बढ़ाकर मापनीय शिक्षण परिणामों एवं दीर्घकालिक प्रभाव पर केंद्रित करता है, जिससे स्नातकों की सफलता और कैरियर पथों पर स्पष्ट फोकस संभव होता है। मुख्य अतिथि एवं विशेषज्ञ प्रो. राजेश पी. खंबायत ने अपने वक्तव्य में बताया कि वर्तमान समय में व्यावहारिक कौशल, कार्यस्थल दक्षता एवं मॉड्यूलर पाठ्यक्रमों की मांग तीव्र है। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम संशोधन, समीक्षा, अनुमोदन एवं क्रियान्वयन हेतु नए पाठ्यक्रम ढाँचे विकसित करने में सक्षम बनाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चंद लोहानी ने कहा कि संवादात्मक सत्रों एवं विशेषज्ञ चर्चाओं के माध्यम से प्रतिभागी परिणाम-आधारित शिक्षा (OBE), रोजगार योग्यता विशेषताएँ, दक्षता मानचित्रण तथा उद्योग-प्रेरित पाठ्यक्रम विकास की व्यावहारिक समझ प्राप्त करेंगे। उन्होंने राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCRF) एवं राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप लचीले, कौशल-उन्मुख पाठ्यक्रमों के डिजाइन पर जोर दिया। कार्यशाला के प्रथम दिवस में चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पाठ्यक्रम मूल्यांकन, योग्यता-आधारित डिजाइन, पाठ्यचर्या संवर्द्धन सहित विविध विषयों पर मंथन हुआ। प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता रही। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विशाल कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त निदेशकगण, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में संकाय सदस्य उपस्थित रहे।


