देशभर से पहुंचे 37 साधक, दस दिनों तक अद्वैत वेदान्त के गूढ़ ज्ञान और साधना से होंगे परिचित।लोहाघाट। हिमालय की शांत व आध्यात्मिक वादियों में स्थित मायावती अद्वैत आश्रम में आज से “अद्वैतामृतम्” नामक दस दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का शुभारंभ हो गया है। इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए 37 साधक भाग ले रहे हैं, जो आने वाले दस दिनों तक अद्वैत वेदान्त के गूढ़ दर्शन और आध्यात्मिक साधना का गहन अध्ययन करेंगे।
शिविर का संचालन अद्वैत आश्रम के विद्वान अध्यक्ष एवं दर्जनों विश्व विख्यात पुस्तकों के लेखक स्वामी शुद्धिदानन्द के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उनके सान्निध्य में प्रतिभागियों को अद्वैत वेदान्त के सिद्धांत, आध्यात्मिक चिंतन, ध्यान, योग और आत्मबोध से जुड़ी शिक्षाएं प्रदान की जा रही है। आश्रम परिसर के शांत, प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य प्रतिभागियों को भारतीय सनातन परंपरा के महान दर्शन अद्वैत वेदान्त से परिचित कराना और जीवन में आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देना है।
शिविर के दौरान प्रतिदिन ध्यान, प्रार्थना, सत्संग, शास्त्र अध्ययन और आध्यात्मिक चर्चा के सत्र आयोजित किए जाएंगे। स्वामी शुद्धिदानन्द जी महाराज के अनुसार “अद्वैतामृतम्” शिविर केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना और आंतरिक शांति प्राप्त करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। उनका कहना है कि अद्वैत एवं वैदान्त की डोर से विश्व को शान्ति, एकता एवं आध्यात्म में बांधा जा सकता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रतिभागी इस शिविर के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के मूल सिद्धांतों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। हिमालय की गोद में बसे मायावती अद्वैत आश्रम में शुरू हुआ यह शिविर आध्यात्मिक साधना और आत्मबोध की दिशा में प्रतिभागियों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव साबित ही नहीं हो रहा है बल्कि पहली बार यहां आए साधकों को अद्वैत आश्रम से निकलने वाली सेवा, समर्पण एवं आध्यात्म की महक ने इतना प्रभावित कर दिया है कि मानों उनका यहां इश्वरीय सत्ता से सीधा साक्षात्कार हो रहा हो।


